नीरज घेवन की मसान : कभी-कभी ज़िंदगी अचानक से धप्पा भी दे देती है

“मसान कहती है कि जीवन में कुछ भी हो, चाहे कितना भी बड़ा या बुरा, वो जीवन से बड़ा नहीं हो सकता,” नीरज पांडेय लिखते हैं।

चार्ल्स बुकोव्स्की की ‘ऑन राइटिंग’ : क्या लेखन के लिए चरस और शराब ज़रूरी है?

“बुकोव्स्की को भी ख़ुद से वही सारी शिकायतें हैं जो मुझे उनसे हैं। यहाँ आकर हमारे बीच का मनमुटाव थोड़ा कम होता है,” नीरज पांडेय लिखते हैं।