देबीप्रसाद चट्टोपाध्याय का भारतीय दर्शन पर शोध : गाँधी और गोडसे के बहाने पुनर्पाठ

“देबीप्रसाद चट्टोपाध्याय को पढ़ते हुए इस बात का अफ़सोस होता है कि हमारे देश में बढ़ती कट्टरता हमारी लम्बी वैचारिक परंपरा को किस तरह से ख़ारिज कर रही है,” सौरभ राय लिखते हैं।

एल्विन पैंग की कविताएँ : बारिश और जैज़ का संगीत

“पैंग की कविताएँ बेचैन करती हैं। कवि अपने शहरी जीवन का उत्सव मनाता है और इसी उत्सव की उत्सुकता हमारे एलियनेट होते चले जा रहे समाज की आस्था को ललकारती है,” सौरभ राय लिखते हैं।

सुधीर रंजन सिंह की मोक्षधरा : कवि का मोक्ष कविता है

“एलियट ने कहा था कि अच्छी कविता समझ में आने से पहले ही अपना संवाद स्थापित करने में सक्षम होती है। सुधीर रंजन सिंह की कविताओं में अक्सर यही बात दिखाई पड़ती है,” सौरभ राय लिखते हैं।