शमशेर की ‘लौट आ ओ धार’ : बीते समय को दूर से देखने की कविता

“यह कविता अथवा काव्यभाषा ही है, जो मृत्यु से संघर्ष का दम रखती है, उसे नीचा दिखाती है, उसे झटक देती है,” सुधीर रंजन सिंह लिखते हैं।

सुधीर रंजन सिंह की मोक्षधरा : कवि का मोक्ष कविता है

“एलियट ने कहा था कि अच्छी कविता समझ में आने से पहले ही अपना संवाद स्थापित करने में सक्षम होती है। सुधीर रंजन सिंह की कविताओं में अक्सर यही बात दिखाई पड़ती है,” सौरभ राय लिखते हैं।