शमशेर की ‘लौट आ ओ धार’ : बीते समय को दूर से देखने की कविता

“यह कविता अथवा काव्यभाषा ही है, जो मृत्यु से संघर्ष का दम रखती है, उसे नीचा दिखाती है, उसे झटक देती है,” सुधीर रंजन सिंह लिखते हैं।