शमशेर की ‘लौट आ ओ धार’ : बीते समय को दूर से देखने की कविता

“यह कविता अथवा काव्यभाषा ही है, जो मृत्यु से संघर्ष का दम रखती है, उसे नीचा दिखाती है, उसे झटक देती है,” सुधीर रंजन सिंह लिखते हैं।

मुक्तिबोध की कविता ‘अँधेरे में’ : चित्रों के लिखित उपयोग की महागाथा

“यह कविता टाइम–लैप्स टेक्निक और फोटोग्राफी के दर्शन को खुद में बहुत सुन्दर ढंग से समाहित करती है. यह किसी कवि द्वारा रचित चित्रों के लिखित उपयोग की महागाथा है,” लवली गोस्वामी लिखती हैं.

एल्विन पैंग की कविताएँ : बारिश और जैज़ का संगीत

“पैंग की कविताएँ बेचैन करती हैं। कवि अपने शहरी जीवन का उत्सव मनाता है और इसी उत्सव की उत्सुकता हमारे एलियनेट होते चले जा रहे समाज की आस्था को ललकारती है,” सौरभ राय लिखते हैं।

सुधीर रंजन सिंह की मोक्षधरा : कवि का मोक्ष कविता है

“एलियट ने कहा था कि अच्छी कविता समझ में आने से पहले ही अपना संवाद स्थापित करने में सक्षम होती है। सुधीर रंजन सिंह की कविताओं में अक्सर यही बात दिखाई पड़ती है,” सौरभ राय लिखते हैं।