‘भूख ऐसे लगी हुई है जैसे गड्ढे में पेड़’ : लीलाधर जगूड़ी का काव्यसंसार

हमारे समय के प्रतनिधि हिंदी कवि लीलाधर जगूड़ी की काव्य यात्रा पर कविता पनिया का आलेख। 

शमशेर की ‘लौट आ ओ धार’ : बीते समय को दूर से देखने की कविता

“यह कविता अथवा काव्यभाषा ही है, जो मृत्यु से संघर्ष का दम रखती है,” सुधीर रंजन सिंह लिखते हैं।