मोहन राकेश के नाटक ‘आधे अधूरे’ का बेंगलुरु में मंचन : एक अनूठी प्रस्तुति

“एक पहलू जिसने इस प्रस्तुति को अद्भुत बनाया वो था नेपथ्य में चल रहा छायाओं का खेल,” सुरभी घोष चटर्जी लिखती हैं।